सौर वेधशाला अंतरिक्ष यान , आदित्य-एल1 को 6 जनवरी 2024 को पृथ्वी से लगभग 1.5 मिलियन किलोमीटर दूर हेलो-ऑर्बिट में सफलतापूर्वक स्थापित किया गया। इसे 2 सितंबर 2023 को इसरो द्वारा लॉन्च किया गया था ।
हेलो ऑर्बिट एक आवधिक, त्रि-आयामी कक्षा है जो लैग्रेंजियन बिंदु L1 पर सूर्य, पृथ्वी और अंतरिक्ष यान को समाहित करती है । हेलो ऑर्बिट के कई लाभ हैं, जैसे कि यह सूर्य का अबाधित और निरंतर अवलोकन करने और पृथ्वी को देखने की सुविधा प्रदान करती है, जिससे जमीनी स्टेशनों के साथ निर्बाध संचार संभव हो पाता है। साथ ही, यह सौर पवन और कणों के "इन सीटू" नमूने लेने के लिए उपयुक्त है क्योंकि यह पृथ्वी के मैग्नेटोस्फीयर के बाहर स्थित है।
अंतरिक्ष आधारित यह सौर वेधशाला अगले पांच वर्षों तक सूर्य के गुणसूत्रमंडल और कोरोना की गतिशीलता का निरंतर अध्ययन करेगी।
2 दिसंबर 1995 को लॉन्च की गई सोलर एंड हेलियोस्फेरिक ऑब्जर्वेटरी (SOHO) ईएसए और नासा की एक संयुक्त परियोजना थी ।
नासा की सोलर डायनेमिक्स ऑब्जर्वेटरी (एसडीओ) को सौर गतिविधि और अंतरिक्ष मौसम का अध्ययन करने के लिए 11 फरवरी 2010 को लॉन्च किया गया था और इसके 2030 तक चालू रहने की उम्मीद है।
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